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गोरखपुर में CM Yogi ने दोहराया मोदी मंत्र, “सबका साथ सबका विकास”

गोरखपुर में CM Yogi ने दोहराया मोदी मंत्र, “सबका साथ सबका विकास”

CM Yogi

मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत में सभ्यता, संस्कृति और मानवीय जीवन मूल्य चरम पर थे जब दुनिया में इनके प्रति आग्रह नहीं था। हमारे ऋषि परंपरा, जियो और जीने दो, का पालन करते रहे हैं क्योंकि यही वास्तविक लोकतंत्र है और भारत ने ही इस मूल्यपूर्ण लोकतंत्र को जन्म दिया है। रविवार को CM Yogi ने “लोकतंत्र की जननी है भारत” विषयक समसामयिक विषयों के सम्मेलनों की श्रृंखला के पहले दिन, युगपुरुष ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ जी महाराज की 55वीं और राष्ट्रसंत ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ जी महाराज की 10वीं पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में सम्मेलन की अध्यक्षता की।

मुख्यमंत्री एवं गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथने सम्मेलन के मुख्य अतिथि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह का अभिनंदन करते हुए कहा कि लोकतंत्र को वैदिक काल से लेकर रामायण और महाभारत के समय तक देखा जा सकता है। भारत के लोकतंत्र में हमेशा से जनता की आवाज और जनता का हित सर्वोपरि था। राजा को अपनी जनता का सुख सुनिश्चित करना भारतीय संस्कृति में हमेशा से रहा है। रामायण काल में भी भगवान श्रीराम ने लोगों की आवाज को महत्व दिया।

गणपरिषद ने वरिष्ठ व्यक्ति के नेतृत्व में सरकारी काम करते थे

भगवान श्रीकृष्ण ने भी कभी खुद को राजा नहीं समझा। गणपरिषद शासन को उनके वरिष्ठ व्यक्ति के नेतृत्व में देखती थी। इस परिषद के सदस्यों ने द्वारिका में लड़ाई में मर-मिट गए। उस समय भगवान श्रीकृष्ण ने कहा कि राज्य के नियम सभी लोगों पर समान रूप से लागू होते हैं जब परिषद के सदस्य मर गए।

जनहित ही लोकतंत्र की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश में अभी भी कुछ लोगों में गुलामी का विचार है। लोकतंत्र भारत में पुराना है। उनका कहना था कि लोकतंत्र की विरासत को बचाने में असफलता ने भारत को गुलाम बनाया। उनका कहना था कि जनता के प्रतिनिधित्व वाले परिषद ने प्राचीन भारत में निरंकुश राजा को गिरफ्तार करने का अधिकार था। लोकतंत्र में जनहित सर्वोपरि है। पुराने वैशाली गणराज्य का उदाहरण है, जहां पूरी व्यवस्था लोगों के हित में काम करती थी।

लोकतंत्र मजबूत होगा अगर हम संविधान को सर्वोच्च सम्मान देंगे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज सभी भारतीयों को लोकतंत्र, लोकतांत्रिक सिद्धांतों और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था पर गर्व करना चाहिए। उनका कहना था कि हमारा लोकतंत्र सुरक्षित है जब तक संविधान सुरक्षित है। पवित्र भावना से, जाति, मत, मजहब, क्षेत्र से ऊपर उठकर सभी को संविधान को बचाना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि अगर हम संविधान का सम्मान करते हुए आगे बढ़ेंगे तो हमारा लोकतंत्र मजबूत होगा।

लोकतंत्र केवल भारतीय मूल्यों और संस्कृति से प्रेरित है

हरिवंश नारायण*: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने “लोकतंत्र की जननी है भारत” विषयक सम्मेलन में बोलते हुए कहा कि भारतीय मूल्यों में लोकतंत्र का मूल्य है। भारतीय मूल्यों और संस्कृति ही लोकतंत्र का मूल है। श्री हरिवंश ने कहा कि भारत की हजारों वर्षों की परंपरा में खुलकर अपनी बात रखना ही लोकतंत्र का यथार्थ है। भारतीय लोकतंत्र में जनता को हर तरह की आजादी के साथ-साथ कमियों को भी सुधारने का अधिकार है। उनका कहना था कि अंग्रेजी संस्कृति से प्रेरित लोगों ने ही भारतीय लोकतंत्र को बाहर से लाया गया समझने की भूल की है। भारतीय लोकतंत्र ने यूनान को दूर से देखने की आदत डाली, जो इस भूल का कारण था।

 अगले साल संविधान की लागू होने वाली वर्षगांठ मनाएंगे।

उनका कहना था कि भारत को आजादी मिलने के बाद कई विदेशी वैज्ञानिकों ने कहा था कि भारत में लोकतंत्र टिकेगा नहीं, और आज हम अगले साल संविधान लागू होने का अमृत वर्ष मनाने जा रहे हैं। श्री हरिवंश ने कहा कि आज भारत लोकतंत्र की जननी के असली रूप से दुनिया को दिखा रहा है। इस विषय को पहले कभी नहीं उठाया गया था। भारत ने आज जी-20 सम्मेलन में इस पर चर्चा की। ऐसे कार्यक्रमों से यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी भारतीय लोकतंत्र को लेकर महत्वपूर्ण बहस कर रहे हैं।

भारत में त्याग और नैतिकता की एक परंपरा है

राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि वेद, पुराण, उपनिषद और ऋषियों की परंपरा का मूल्य भारत में था। धर्म हमारी लोकतांत्रिक व्यवस्था में मार्गदर्शक था, इसलिए यहां आततायी शासकों का वर्णन नहीं है। राजा, देवता और आम लोग धर्म से जुड़े हुए थे। भारत में नैतिकता और त्याग की परंपरा है। राजा इतना शक्तिशाली था, फिर भी स्वेच्छाचारी नहीं था। धर्मदंड भी चक्रवर्ती सम्राट को चेतावनी दी गई।

अब्राहम लिंकन ने 2700 पूर्व का प्रजातंत्र बताया

श्री हरिवंश ने कहा कि 2700 वर्ष पूर्व कौटिल्य के अर्थशास्त्र में अब्राहम लिंकन ने लोकतंत्र की परिभाषा दी थी कि राजा का सुख जनता का सुख है। जैसा कि शोक ने अपने धौली लेख में लिखा है, हर व्यक्ति मेरी संतान है। यह सब लोकतंत्र के सिद्धांत हैं। अथर्ववेद भी लोकतांत्रिक व्यवस्था का उल्लेख करता है। ब्रिटिश इतिहासकार थॉमसन ने कहा कि लंदन के हाउस ऑफ कॉमंस के नियम लगता है कि भारत की पुरानी सभाओं से लिए गए हैं। जार्ज बर्नाड शॉ ने भी आश्चर्य जताते हुए कहा कि ग्रीक और रोम की सभ्यता मिट गई, लेकिन भारत की सभ्यता और संस्कृति कैसे बच गई? वास्तव में, वेद, पुराण और ऋषि भारत की सभ्यता और संस्कृति का मूल है। भारत की संस्कृति और सभ्यता पुराने मूल्यों से प्रेरित हैं।

पुराने गांवों में आत्मशासन की व्यवस्था थी

हरिवंश नारायण सिंह ने कहा कि भारत को लोकतंत्र की जननी कहा जाता है क्योंकि इस देश में प्राचीन काल से गांव स्तर तक लोकतंत्र सम्मत आत्मशासन था। जनजातीय क्षेत्रों में लोकतांत्रिक मूल्यों वाली स्थानीय परिषदें भी थीं। भारत में भक्ति आंदोलन ने भी लोकतंत्र को प्रेरित किया और इसे सुदृढ़ किया।

अब जाकर 100 साल का रोडमैप बनाओ

राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आजादी के बाद देश के अगले सौ साल का रोडमैप बनाया है। 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए उन्होंने एक लाख युवाओं को राजनीति में आने का आह्वान किया है। जबकि चीन ने 1947-48 में ही सौ साल की योजना बनाई थी। 70 के दशक में चूक हुई, लेकिन चीन हमसे पांच गुना आगे बढ़ा।

मुख्यमंत्री योगी ने रामराज की भावना को साकार किया

श्री हरिवंश ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को रामराज की संकल्पना साकार करने वाला बताते हुए कहा कि योगी जी में रामराज की स्पिरिट दिखती है। ठीक उसी तरह, योगी जी की कार्यप्रणाली सबको न्याय और सुरक्षा के पुरातन भारतीय मूल्यों को दिखाती है। राज्यसभा के उपसभापति ने ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ और ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की पुण्य स्मृति को नमन करते हुए कहा कि भविष्य के लोगों को याद करना प्रेरणा देता है। इन दोनों गोरक्षपीठाधीश्वरों ने राष्ट्रीय, सामाजिक और सांस्कृतिक चेतना के पुनर्जागरण में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवेद्यनाथ ने भारतीय मूल्यों को अपने जीवन भर समर्पित किया।

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