Hariyaana Vidhaanasabha Chunaav : इस बार हिसार में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिल रहा है
Hariyaana Vidhaanasabha Chunaav :हिसार में HOT सीट मुकाबला, देश की सबसे अमीर महिला के मैदान में आने से समीकरण कितने बदल गया?
Hariyaana Vidhaanasabha Chunaav कांग्रेस और बीजेपी के बीच पहला मुकाबला था। लेकिन देश की सबसे अमीर महिला और पूर्व मंत्री भी इस पद से निर्दलीय छुट्टी ले रहे हैं। अब बीजेपी-कांग्रेस के पास कोई रास्ता नहीं है।
Hariyaana Vidhaanasabha Chunaav अब मुकाबला रोमांचक हो गया है क्योंकि पूर्व मंत्री सावित्री जिंदल ने हिसार की सीट पर निर्दलीय ताल ठोंक दी है। हिसार में देश की सबसे अमीर महिला सावित्री जिंदल ने पहले भी जीत हासिल की है। इस बार वह बीजेपी से टिकट चाह था। लेकिन बीजेपी ने वर्तमान विधायक और मंत्री डॉ. कमल गुप्ता पर भरोसा रखा। यही स्थान है जहां से कांग्रेस ने रामनिवास राड़ा पर दांव खेला है। भाजपा और कांग्रेस दोनों को सावित्री जिंदल के मैदान में आने के बाद मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। राड़ा सैनिक समाज से हैं, जो एक दशक बाद कांग्रेस को हराने की चुनौती है।
डॉ. कमल गुप्ता को तीसरी बार कमल खिलाने के लिए हिसार से 21 प्रत्याशी मैदान में हैं। हिसार के पूर्व मेयर गौतम सरदाना भी निर्दलीय चुनाव में भाग ले रहे हैं। कितने लोग उनका समर्थन करते हैं? 8 अक्टूबर को नतीजों की घोषणा के बाद जानकारी मिलेगी। हरियाणा में 5 अक्टूबर को मतदान होना चाहिए। हिसार सीट पर 21 प्रत्याशी चुनाव में भाग ले रहे हैं।
टिकट नहीं मिलने को सावित्री जिंदल ने अपनी नाक का सवाल बना लिया है। हिसार की राजनीति से जिंदल घराने को अलग करके नहीं देखा जा सकता। इस पद पर जिंदल परिवार को राजनीतिक लाभ मिलता है। जिंदल परिवार ने यहां से छह बार चुनाव लड़ा है। जिसमें पांच बार जीत मिली है। सावित्री जिंदल ने जीत का सबसे बड़ा रिकॉर्ड हासिल किया है। 2014 में कमल गुप्ता ने सावित्री जिंदल को यहां से हराया था।
गुप्त के सामने जीवन की सबसे बड़ी चुनौती
कमल गुप्ता को फिर से एक बड़ी चुनौती मिली है। Kamal Gupta को संघ का एक करीबी माना जाता है। जिससे वे टिकट पाने में सफल रहे। माना जाता है कि सावित्री जिंदल को गौतम सरदाना के जितने वोट मिलेंगे, उतना ही लाभ होगा। वहीं, कांग्रेस से टिकट पाने वाले राड़ा कुमारी शैलजा के विश्वासपात्र हैं। उनका लक्ष्य ओबीसी मतदाताओं को एकजुट करना होगा। हिसार में सैनी बिरादरी का भी अच्छा प्रभाव है। यहां से व्यापार मंडल के प्रांतीय अध्यक्ष बजरंग दास गर्ग भी टिकट मांग रहे थे। जो टिकट नहीं मिलने से परेशान बताए जा रहे हैं।
गौतम सरदाना पंजाबी हैं। मुकाबले में नहीं, लेकिन समीकरण बिगाड़ सकते हैं। दूसरी पार्टियों को पंजाबी वोट मिलेंगे। ऐसा लगता है। 2014 के चुनाव में सरदाना सावित्री जिंदली से सिर्फ 600 वोटों से पीछे रहे थे और तीसरे स्थान पर रहे थे। मेयर रहते हुए भी उनके ऊपर जनता की अनदेखी के आरोप लगे हैं।
14 बार विजेता वैश्य प्रत्याशी को हिसार सीट पर 30 हजार वोट मिले हैं। 24 हजार पंजाबी वोट दूसरे स्थान पर हैं। सैनी समाज के 17000 और जाटों के 13000 वोट निर्णायक हैं। वहाँ ब्राह्मणों के 10 हजार वोट हैं। आजादी के बाद हिसार की सीट पर उन्हें 17 बार चुनाव जीता गया है। जिसमें वैश्य प्रत्याशी 14 बार, पंजाबी प्रत्याशी 2 बार और सैनी प्रत्याशी 1 बार जीते हैं। इस बार हिसार से विजेता कौन होगा?